चंडीगढ़। दुनिया में सबसे शक्तिशाली वस्तु क्या है? हमारा चिंतन। हम जो बार-बार सोचते हैं, वैसा ही काम करने लगते हैं, और फिर वैसे ही बन जाते हैं। जैसे ही नकारात्मक चिंतन शुरू हो, हमें अपने मन को दूसरी दिशा में मोड़ देना चाहिए क्योंकि एक बार हम गलत चिंतन के भँवर में फँस गए, फिर तो वो जंगल की आग की तरह फैलती जाएगी।
जगद्गुरु कृपालु जी महाराज दूसरा तरीका बताते हैं अपने से नीचे देखना। मतलब जब हमें लगे कि हमारे पास ऐसी गाड़ी, ऐसा घर, इतना पैसा नहीं है तो सोचें कि संसार में तो करोड़ों हैं जिनके पास तो मेरी जितनी वस्तुएँ भी नहीं हैं। किसी के माँ-बाप नहीं हैं, किसी के हाथ-पैर ही नहीं हैं, किसी को दो वक़्त की रोटी नहीं मिलती। हम कम से कम उनसे तो अच्छे हैं। ये सोचने से तनाव बहुत कम हो जायेगा।